वाल्मीकि रामायण 1.39.11
षष्टिम् पुत्र सहस्राणि वाक्यम् एतत् उवाच ह ।गतिम् पुत्रा न पश्यामि रक्षसाम् पुरुषर्षभाः॥
ṣaṣṭim putra sahasrāṇi vākyam etat uvāca ha |gatim putrā na paśyāmi rakṣasām puruṣarṣabhāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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