वाल्मीकि रामायण 1.39.23
ते प्रसाद्य महात्मानम् विषण्ण वदनाः तदा ।ऊचुः परम संत्रस्ताः पितामहम् इदम् वचः॥
te prasādya mahātmānam viṣaṇṇa vadanāḥ tadā |ūcuḥ parama saṃtrastāḥ pitāmaham idam vacaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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