वाल्मीकि रामायण 1.39.25
अयम् यज्ञ हरो अस्माकम् अनेन अश्वो अपनीयते ।इति ते सर्व भूतानि हिंसन्ति सगर आत्मजः॥
ayam yajña haro asmākam anena aśvo apanīyate |iti te sarva bhūtāni hiṃsanti sagara ātmajaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें