वाल्मीकि रामायण 1.39.3
तस्य तत् वचनम् श्रुत्वा कौतूहल समन्वितः ।विश्वामित्रः तु काकुत्स्थम् उवाच प्रहसन्निव॥
tasya tat vacanam śrutvā kautūhala samanvitaḥ |viśvāmitraḥ tu kākutstham uvāca prahasanniva ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें