वाल्मीकि रामायण 1.39.4
श्रूयताम् विस्तरो राम सगरस्य महात्मनः ।शंकर श्वशुरो नाम हिमवान् इति विश्रुतः॥
śrūyatām vistaro rāma sagarasya mahātmanaḥ |śaṃkara śvaśuro nāma himavān iti viśrutaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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