वाल्मीकि रामायण 1.39.6
स हि देशो नरव्याघ्र प्रशस्तो यज्ञ कर्मणि।तस्य अश्व चर्याम् काकुत्स्थ दृढ धन्वा महारथः॥
sa hi deśo naravyāghra praśasto yajña karmaṇi |tasya aśva caryām kākutstha dṛḍha dhanvā mahārathaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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