वाल्मीकि रामायण 1.39.8
उपाध्याय गणाः सर्वे यजमानम् अथ अब्रुवन् ।अयम् पर्वणि वेगेन यज्ञिय अश्वो अपनीयते॥
upādhyāya gaṇāḥ sarve yajamānam atha abruvan |ayam parvaṇi vegena yajñiya aśvo apanīyate ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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