वाल्मीकि रामायण 1.40.15
यदा पर्वणि काकुत्स्थ विश्रमार्थम् महागजः ।खेदात् चालयते शीर्षम् भूमि कम्पः तदा भवेत्॥
yadā parvaṇi kākutstha viśramārtham mahāgajaḥ |khedāt cālayate śīrṣam bhūmi kampaḥ tadā bhavet ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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