वाल्मीकि रामायण 1.40.27
ते तम् हय हरम् ज्ञात्वा क्रोध पर्याकुल ईक्षणाः ।खनित्र लांगला धर नाना वृक्ष शिला धराः॥
te tam haya haram jñātvā krodha paryākula īkṣaṇāḥ |khanitra lāṃgalā dhara nānā vṛkṣa śilā dharāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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