वाल्मीकि रामायण 1.41.16
विसार्य निपुणाम् दृष्टिम् ततो अपश्यत् खग अधिपम् ।पितृणाम् मातुलम् राम सुपर्णम् अनिल उपमम्॥
visārya nipuṇām dṛṣṭim tato apaśyat khaga adhipam |pitṛṇām mātulam rāma suparṇam anila upamam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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