वाल्मीकि रामायण 1.41.23
ततो राजानम् आसाद्य दीक्षितम् रघुनंदन ।न्यवेदयत् यथा वृत्तम् सुपर्ण वचनम् तथा॥
tato rājānam āsādya dīkṣitam raghunaṃdana |nyavedayat yathā vṛttam suparṇa vacanam tathā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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