वाल्मीकि रामायण 1.43.11
विससर्ज ततो गंगाम् हरो बिन्दु सरः प्रति ।तस्यम् विसृउज्यमानायाम् सप्त स्रोतंसि जज्ञिरे॥
visasarja tato gaṃgām haro bindu saraḥ prati |tasyam visṛujyamānāyām sapta srotaṃsi jajñire ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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