वाल्मीकि रामायण 1.43.32
गंगाम् अन्वगमन् प्रीताः सर्वे जल चराः च ये ।यतो भगीरथो राजा ततो गंगा यशस्विनी॥
gaṃgām anvagaman prītāḥ sarve jala carāḥ ca ye |yato bhagīratho rājā tato gaṃgā yaśasvinī ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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