वाल्मीकि रामायण 1.44.21
धन्यम् यशस्यम् आयुष्यम् पुत्र्यम् स्वर्ग्यम् अथ अपि च ।यः श्रावयति विप्रेषु क्षत्रियेषु इतेरेषु च॥
dhanyam yaśasyam āyuṣyam putryam svargyam atha api ca |yaḥ śrāvayati vipreṣu kṣatriyeṣu itereṣu ca ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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