वाल्मीकि रामायण 1.44.7
पितामहानाम् सर्वेषाम् त्वम् अत्र मनुजाधिप ।कुरुष्व सलिलम् राजन् प्रतिज्ञाम् अपवर्जय॥
pitāmahānām sarveṣām tvam atra manujādhipa |kuruṣva salilam rājan pratijñām apavarjaya ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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