वाल्मीकि रामायण 1.45.21
अथ देवा महादेवम् शंकरम् शरणार्थ्तिनः ।जग्मुः पशुपतिम् रुद्रम् त्राहि त्राहि इति तुष्टुवुः॥
atha devā mahādevam śaṃkaram śaraṇārthtinaḥ |jagmuḥ paśupatim rudram trāhi trāhi iti tuṣṭuvuḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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