वाल्मीकि रामायण 1.46.11
गात्र संवाहनैः चैव श्रम अपनयनैः तथा ।शक्रः सर्वेषु कालेषु दितिम् परिचचार ह॥
gātra saṃvāhanaiḥ caiva śrama apanayanaiḥ tathā |śakraḥ sarveṣu kāleṣu ditim paricacāra ha ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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