वाल्मीकि रामायण 1.46.14
यम् अहम् त्वत् कृते पुत्र तम् आधास्ये जय उत्सुकम् ।त्रैलोक्य विजयम् पुत्र सह भोक्ष्यसि विज्वरः॥
yam aham tvat kṛte putra tam ādhāsye jaya utsukam |trailokya vijayam putra saha bhokṣyasi vijvaraḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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