वाल्मीकि रामायण 1.46.15
याचितेन सुरश्रेष्ट पित्रा तव माहात्मना ।वरो वर्ष सस्र अन्ते मम दत्तः सुतम् प्रति॥
yācitena suraśreṣṭa pitrā tava māhātmanā |varo varṣa sasra ante mama dattaḥ sutam prati ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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