वाल्मीकि रामायण 1.46.2
हत पुत्रा अस्मि भगवन् तव पुत्रैः महाबलैः ।शक्र हन्तारम् इच्छामि पुत्रम् दीर्घ तपो अर्जितम्॥
hata putrā asmi bhagavan tava putraiḥ mahābalaiḥ |śakra hantāram icchāmi putram dīrgha tapo arjitam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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