वाल्मीकि रामायण 1.48.15
हन्त ते कथयिष्यामि शृणु तत्त्वेन राघव ।यस्य एतत् आश्रम पदम् शप्तम् कोपान् महात्मना॥
hanta te kathayiṣyāmi śṛṇu tattvena rāghava |yasya etat āśrama padam śaptam kopān mahātmanā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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