वाल्मीकि रामायण 1.48.17
स च अत्र तप आतिष्ठत् अहल्या सहितः पुरा ।वर्ष पूगानि अनेकानि राजपुत्र महायशः॥
sa ca atra tapa ātiṣṭhat ahalyā sahitaḥ purā |varṣa pūgāni anekāni rājaputra mahāyaśaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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