वाल्मीकि रामायण 1.48.22
आत्मानम् माम् च देवेश सर्वदा रक्ष गौतमात् ।इन्द्रः तु प्रहसन् वाक्यम् अहल्याम् इदम् अब्रवीत्॥
ātmānam mām ca deveśa sarvadā rakṣa gautamāt |indraḥ tu prahasan vākyam ahalyām idam abravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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