वाल्मीकि रामायण 1.49.21
गौतमो अपि महातेजा अहल्या सहितः सुखी ।रामम् सम्पूज्य विधिवत् तपः तेपे महातपाः॥
gautamo api mahātejā ahalyā sahitaḥ sukhī |rāmam sampūjya vidhivat tapaḥ tepe mahātapāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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