वाल्मीकि रामायण 1.5.2
येषाम् स सगरो नाम सागरो येन खानितः ।षष्टिः पुत्र सहस्राणि यम् यान्तम् पर्यवारयन्॥
yeṣām sa sagaro nāma sāgaro yena khānitaḥ |ṣaṣṭiḥ putra sahasrāṇi yam yāntam paryavārayan ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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