वाल्मीकि रामायण 1.51.11
न अतिक्रान्तम् मुनिश्रेष्ठ यत् कर्तव्यम् कृतम् मया ।संगता मुनिना पत्नी भार्गवेण इव रेणुका॥
na atikrāntam muniśreṣṭha yat kartavyam kṛtam mayā |saṃgatā muninā patnī bhārgaveṇa iva reṇukā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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