वाल्मीकि रामायण 1.51.15
न अस्ति धन्यतरो राम त्वत्तो अन्यो भुवि कश्चन ।गोप्ता कुशिक पुत्रः ते येन तप्तम् महत् तपः॥
na asti dhanyataro rāma tvatto anyo bhuvi kaścana |goptā kuśika putraḥ te yena taptam mahat tapaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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