वाल्मीकि रामायण 1.51.26
सततम् संकुलम् श्रीमत् ब्रह्म कल्पैः महात्मभिः ।अब् भक्षैः वायु भक्षैः च शीर्ण पर्ण अशनैः तथा॥
satatam saṃkulam śrīmat brahma kalpaiḥ mahātmabhiḥ |ab bhakṣaiḥ vāyu bhakṣaiḥ ca śīrṇa parṇa aśanaiḥ tathā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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