वाल्मीकि रामायण 1.53.15
आयत्तम् अत्र राज ऋषे सर्वम् एतन् न संशयः ।सर्वस्वम् एतत् सत्येन मम तुष्टि करी तथा॥
āyattam atra rāja ṛṣe sarvam etan na saṃśayaḥ |sarvasvam etat satyena mama tuṣṭi karī tathā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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