वाल्मीकि रामायण 1.6.2
इक्ष्वाकूणम् अतिरथो यज्वा धर्मपरो वशी ।महर्षिकल्पो राजर्षिः त्रिषु लोकेषु विश्रुतः॥
ikṣvākūṇam atiratho yajvā dharmaparo vaśī |maharṣikalpo rājarṣiḥ triṣu lokeṣu viśrutaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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