वाल्मीकि रामायण 1.6.4
यथा मनुर् महातेजा लोकस्य परिरक्षिता ।तथा दशरथो राजा लोकस्य परिरक्षिता॥
yathā manur mahātejā lokasya parirakṣitā |tathā daśaratho rājā lokasya parirakṣitā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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