वाल्मीकि रामायण 1.64.16
कोपेन स महातेजाः तपो अपहरणे कृते ।इन्द्रियैर् अजितै राम न लेभे शान्तिम् आत्मनः॥
kopena sa mahātejāḥ tapo apaharaṇe kṛte |indriyair ajitai rāma na lebhe śāntim ātmanaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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