वाल्मीकि रामायण 1.65.16
भास्करो निष्प्रभः चैव महर्षेः तस्य तेजसा ।बुद्धिम् न कुरुते यावत् नाशे देव महामुनिः॥
bhāskaro niṣprabhaḥ caiva maharṣeḥ tasya tejasā |buddhim na kurute yāvat nāśe deva mahāmuniḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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