वाल्मीकि रामायण 1.65.4
सः कृत्वा निश्चयम् राम तप आतिष्टत् अव्ययम् ।तस्य वर्ष सहस्रस्य व्रते पूर्णे महाव्रतः॥
saḥ kṛtvā niścayam rāma tapa ātiṣṭat avyayam |tasya varṣa sahasrasya vrate pūrṇe mahāvrataḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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