वाल्मीकि रामायण 1.67.17
आरोपयित्वा मौर्वीम् च पूरयामास वीर्यवान् ।तत् बभंज धनुर् मध्ये नरश्रेष्ठो महायशाः॥
āropayitvā maurvīm ca pūrayāmāsa vīryavān |tat babhaṃja dhanur madhye naraśreṣṭho mahāyaśāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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