वाल्मीकि रामायण 1.67.22
जनकानाम् कुले कीर्तिम् आहरिष्यति मे सुता ।सीता भर्तारम् आसाद्य रामम् दशरथ आत्मजम्॥
janakānām kule kīrtim āhariṣyati me sutā |sītā bhartāram āsādya rāmam daśaratha ātmajam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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