वाल्मीकि रामायण 1.7.13
ब्रह्म क्षत्रम् अहिंसन्तः ते कोशम् समपूरयन् ।सुतीक्ष्ण दण्डाः संप्रेक्ष्य पुरुषस्य बलाबलम्॥
brahma kṣatram ahiṃsantaḥ te kośam samapūrayan |sutīkṣṇa daṇḍāḥ saṃprekṣya puruṣasya balābalam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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