वाल्मीकि रामायण 1.7.21
अवेक्षमाणः चारेण प्रजा धर्मेण रक्षयन् ।प्रजानाम् पालनम् कुर्वन् अधर्मम् परिवर्जयन्॥
avekṣamāṇaḥ cāreṇa prajā dharmeṇa rakṣayan |prajānām pālanam kurvan adharmam parivarjayan ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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