वाल्मीकि रामायण 1.73.16
सद्यो अहम् त्वत् प्रतीक्षो अस्मि वेद्याम् अस्याम् प्रतिषितः ।अविघ्नम् कुरुताम् राजा किम् अर्थम् हि विलम्ब्यते॥
sadyo aham tvat pratīkṣo asmi vedyām asyām pratiṣitaḥ |avighnam kurutām rājā kim artham hi vilambyate ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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