वाल्मीकि रामायण 1.73.29
देव दुंदुभि निर्घोषः पुष्प वर्षम् महान् अभूत् ।एवम् दत्त्वा सुताम् सीताम् मंत्र उदक पुरस्कृताम्॥
deva duṃdubhi nirghoṣaḥ puṣpa varṣam mahān abhūt |evam dattvā sutām sītām maṃtra udaka puraskṛtām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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