वाल्मीकि रामायण 1.73.3
केकय अधिपती राजा स्नेहात् कुशलम् अब्रवीत् ।येषाम् कुशलकामो असि तेषाम् संप्रति अनामयम्॥
kekaya adhipatī rājā snehāt kuśalam abravīt |yeṣām kuśalakāmo asi teṣām saṃprati anāmayam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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