वाल्मीकि रामायण 1.73.32
गृहाण पाणिम् माण्डव्याः पाणिना रघुनंदन ।शत्रुघ्नम् च अपि धर्माअत्मा अब्रवीत् मिथिलेश्वरः॥
gṛhāṇa pāṇim māṇḍavyāḥ pāṇinā raghunaṃdana |śatrughnam ca api dharmāatmā abravīt mithileśvaraḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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