वाल्मीकि रामायण 1.73.39
ईदृशे वर्तमाने तु तूर्य उद्घुष्ट निनादिते ।त्रिः अग्निम् ते परिक्रम्य ऊहुः भार्या महौजसः॥
īdṛśe vartamāne tu tūrya udghuṣṭa ninādite |triḥ agnim te parikramya ūhuḥ bhāryā mahaujasaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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