वाल्मीकि रामायण 1.73.7
दृष्ट्वा परम सत्कारैः पूजार्हम् समपूजयत् ।ततः ताम् उषितो रात्रिम् सह पुत्रैः महात्मभिः॥
dṛṣṭvā parama satkāraiḥ pūjārham samapūjayat |tataḥ tām uṣito rātrim saha putraiḥ mahātmabhiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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