वाल्मीकि रामायण 1.75.15
शिति कण्ठस्य विष्णोः च बल अबल निरीक्षया ।अभिप्रायम् तु विज्ञाय देवतानाम् पितामहः॥
śiti kaṇṭhasya viṣṇoḥ ca bala abala nirīkṣayā |abhiprāyam tu vijñāya devatānām pitāmahaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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