वाल्मीकि रामायण 1.75.22
ऋचीके भार्गवे प्रादात् विष्णुः स न्यासम् उत्तमम् ।ऋचीकः तु महातेजाः पुत्रस्य अप्रतिकर्मणः॥
ṛcīke bhārgave prādāt viṣṇuḥ sa nyāsam uttamam |ṛcīkaḥ tu mahātejāḥ putrasya apratikarmaṇaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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