वाल्मीकि रामायण 1.76.11
जडी कृते तदा लोके रामे वर धनुर् धरे ।निर्वीर्यो जामदग्न्यो असौ रमो रामम् उदैक्षत॥
jaḍī kṛte tadā loke rāme vara dhanur dhare |nirvīryo jāmadagnyo asau ramo rāmam udaikṣata ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें