वाल्मीकि रामायण 1.77.16
भरतम् कैकेयी पुत्रम् अब्रवीत् रघुनंदन ।अयम् केकय राजस्य पुत्रो वसति पुत्रक॥
bharatam kaikeyī putram abravīt raghunaṃdana |ayam kekaya rājasya putro vasati putraka ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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