वाल्मीकि रामायण 1.77.2
अभिवाद्य ततो रामो वसिष्ठ प्रमुखान् ऋषीन् ।पितरम् विह्वलम् दृष्ट्वा प्रोवाच रघुनंदनः॥
abhivādya tato rāmo vasiṣṭha pramukhān ṛṣīn |pitaram vihvalam dṛṣṭvā provāca raghunaṃdanaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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