वाल्मीकि रामायण 1.8.24
उवाच दीक्षाम् विशत यक्षेऽहम् सुत कारणात् ।तासाम् तेन अति कान्तेन वचनेन सुवर्चसाम् ।मुख पद्मान् अशोभन्त पद्मानीव हिमात्यये॥
uvāca dīkṣām viśata yakṣe'ham suta kāraṇāt |tāsām tena ati kāntena vacanena suvarcasām |mukha padmān aśobhanta padmānīva himātyaye ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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